
Chhath Puja: 36 घंटे का सबसे कठिन निर्जला व्रत, जानिए कैसे मिलती है भक्तों को दैवीय शक्ति
लोक आस्था का महापर्व छठ पूरे देश में धूमधाम से मनाया जा रहा है. यह महापर्व नोएडा से लेकर गाजियाबाद तक अपनी छटा बिखेर रहा है. महापर्व का दूसरा दिन खरना है, जिसमें व्रती दिनभर उपवास के बाद शाम को गुड़ की खीर का प्रसाद ग्रहण करते हैं. इस प्रसाद के बाद 36 घंटे का कठिन निर्जला व्रत शुरू होता है, जो उगते सूर्य को अर्घ्य देने के बाद ही संपन्न होगा. हमारे विशेष कार्यक्रम में ज्योतिषाचार्य संजय शर्मा और ज्योतिर्विद अरविंद शुक्ला ने इस पर्व की महिमा पर प्रकाश डाला. अरविंद शुक्ला ने सूर्य के अंदर ब्रह्मा, विष्णु, महेश के समाहित होने और अस्त होते सूर्य को प्रत्यूषा तथा उदय होते सूर्य को उषा के नाम से जल अर्पित करने की विधि बताई. कार्यक्रम में पौराणिक कथाओं का भी जिक्र हुआ, जिसके अनुसार द्रौपदी ने भी यह व्रत किया था. नोएडा से हमारी सहयोगी श्वेता झा ने व्रतियों के साथ हो रही पूजा का सजीव चित्रण प्रस्तुत किया, जिसमें खरना पूजा की विधि, ठेकुआ बनाने का उत्साह, सामाजिक समरसता, वैज्ञानिक महत्व, प्रकृति, स्वच्छता और पारिवारिक जुड़ाव को उजागर किया गया. यह पर्व सिर्फ एक पूजा नहीं, बल्कि आस्था, प्रकृति और स्वच्छता का प्रतीक है.
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